बिहार में राहुल गांधी की ‘दलित पॉलिटिक्स’ ने बढ़ाई तेजस्वी यादव की टेंशन! महागठबंधन में नया सत्ता संग्राम?

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,14 मई ।
बिहार की सियासत में एक नई हलचल मच चुकी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब सीधे तौर पर दलित वोट बैंक पर फोकस करने लगे हैं — और यही बात बन गई है तेजस्वी यादव के लिए सिरदर्द। बिहार की राजनीति में जहां अब तक यादव-मुस्लिम समीकरण (MY फॉर्मूला) आरजेडी की ताकत मानी जाती थी, वहीं अब राहुल गांधी ने दलित समुदाय को साधकर महागठबंधन के भीतर ही सत्ता संतुलन हिला दिया है।

राहुल गांधी की हालिया रैलियों और पदयात्राओं में दलितों के मुद्दों को जिस आक्रामकता से उठाया जा रहा है, उसने साफ संकेत दे दिए हैं कि कांग्रेस अब बिहार में स्वतंत्र दलित आधार बनाने के मिशन पर है। पटना, आरा और गया जैसे इलाकों में राहुल ने बाबासाहेब अंबेडकर की विरासत, दलित उत्पीड़न और आरक्षण जैसे मुद्दों को पूरी ताकत से उछालकर आरजेडी के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है।

कांग्रेस की रणनीति है – “तेजस्वी यादव OBC में मजबूत हैं, लेकिन दलितों के बीच अब हमारी बात सुनी जाएगी।”

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि राहुल गांधी की यह रणनीति महागठबंधन में अंदरूनी दरार पैदा कर सकती है। तेजस्वी यादव जो खुद को बिहार में विपक्ष का बेताज बादशाह मानते हैं, उन्हें कांग्रेस के इस बढ़ते हस्तक्षेप से साफ असहजता है।

आरजेडी के एक वरिष्ठ नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं –

“अगर कांग्रेस अपने दम पर दलित वोट बैंक बनाती है तो आरजेडी की पकड़ कमजोर होगी। इससे महागठबंधन में नेतृत्व को लेकर खींचतान होना तय है।”

जानकारों का कहना है कि कांग्रेस बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव से पहले खुद को सिर्फ ‘सहयोगी’ नहीं, प्रभावी साझेदार के रूप में स्थापित करना चाहती है। इसके लिए दलितों का समर्थन सबसे बड़ा हथियार है। कांग्रेस जानती है कि बिना जमीन पर वोट बैंक मजबूत किए, वह सिर्फ दिल्ली से सत्ता में हिस्सेदारी की उम्मीद नहीं कर सकती।

इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी पैनी नजर बनाए हुए है। पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के बीच मतभेद बढ़ते हैं तो नीतीश कुमार के जाने के बाद जो वैक्यूम बना है, वह बीजेपी के लिए सुनहरा मौका हो सकता है।

बीजेपी प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा –

“जिनके पास खुद का आधार नहीं है, वो अब दूसरों की थाली में से हिस्सा मांग रहे हैं। बिहार की जनता सब देख रही है।”

राहुल गांधी का दलित राजनीति पर फोकस एक सोची-समझी चाल है। लेकिन यह चाल आरजेडी के लिए दोधारी तलवार साबित हो सकती है। एक तरफ गठबंधन का साथ, दूसरी ओर वोट बैंक की होड़ – तेजस्वी यादव के लिए ये समीकरण सियासी उलझन बन चुके हैं। क्या महागठबंधन दलित वोट की इस लड़ाई को संभाल पाएगा या आने वाले चुनावों में यह ‘गठबंधन’ खुद एक ‘भटकाव’ बन जाएगा?

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