रेजरपे के फाउंडर्स हर्षिल माथुर और शशांक कुमार: सबसे युवा अरबपतियों में शामिल

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,31अगस्त। भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में पिछले एक दशक में जबरदस्त क्रांति आई है। इस क्रांति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं रेजरपे के फाउंडर्स, हर्षिल माथुर और शशांक कुमार। ये दोनों युवा उद्यमी न केवल भारत में ऑनलाइन पेमेंट्स को सरल और सुरक्षित बनाने में कामयाब रहे हैं, बल्कि अरबपतियों की सूची में भी अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।

रेजरपे की शुरुआत और सफलता की कहानी

हर्षिल माथुर और शशांक कुमार ने रेजरपे की स्थापना 2014 में की थी। उनका उद्देश्य भारतीय व्यापारियों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म प्रदान करना था, जो उन्हें ऑनलाइन पेमेंट्स स्वीकार करने में सहायता करे। उस समय, भारतीय व्यापारियों के लिए ऑनलाइन पेमेंट्स सिस्टम सेटअप करना जटिल और महंगा होता था। इस समस्या को समझते हुए, हर्षिल और शशांक ने रेजरपे की नींव रखी, जिससे व्यापारियों के लिए पेमेंट्स स्वीकार करना सरल और सुविधाजनक हो गया।

इनकी सफलता का राज

रेजरपे की सफलता के पीछे का मुख्य कारण इसका उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस और सुरक्षित पेमेंट गेटवे है। रेजरपे न केवल क्रेडिट और डेबिट कार्ड्स से पेमेंट्स को स्वीकार करता है, बल्कि UPI, नेट बैंकिंग, और मोबाइल वॉलेट्स जैसे अन्य पेमेंट विकल्प भी प्रदान करता है। इसके अलावा, रेजरपे ने छोटे और मझोले व्यवसायों के लिए वित्तीय समाधान भी प्रदान किए हैं, जो उन्हें अपने बिजनेस को बढ़ाने में मदद करते हैं।

युवा अरबपतियों की सूची में शामिल

रेजरपे की सफलता ने हर्षिल माथुर और शशांक कुमार को अरबपतियों की सूची में शामिल कर दिया है। लिंक्डइन पर हर्षिल माथुर की प्रोफाइल के अनुसार, रेजरपे के माध्यम से आज लाखों व्यापारी और व्यवसायी अपने पेमेंट्स का प्रबंधन कर रहे हैं। कंपनी की सफलता ने दोनों फाउंडर्स को न केवल वित्तीय स्वतंत्रता दिलाई है, बल्कि उन्हें भारत के सबसे युवा अरबपतियों में शामिल कर दिया है।

भविष्य की योजनाएं

रेजरपे की सफलता की यात्रा अभी थमी नहीं है। कंपनी का लक्ष्य है कि वह नए-नए वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के माध्यम से अपने ग्राहकों को और भी बेहतर अनुभव प्रदान करे। हर्षिल और शशांक का उद्देश्य है कि वे भारत के छोटे और मझोले व्यवसायों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर उनके विकास में योगदान दें।

रेजरपे की इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि सही विचार और दृढ़ संकल्प के साथ, युवा उद्यमी न केवल अपने देश के आर्थिक विकास में योगदान कर सकते हैं, बल्कि खुद को भी ऊँचाईयों तक पहुंचा सकते हैं। हर्षिल माथुर और शशांक कुमार की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जो अपने उद्यम के माध्यम से कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं।

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