मच्छरों के प्रकोप से शहर हुआ हलकान… कांग्रेस

60 कर्मचारियों के भरोसे चल रहा इंदौर में मच्छर विरोधी अभियान...

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समग्र समाचार सेवा
इंदौर, 22 अप्रैल। इंदौर शहर मे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनियां, जापानी बुखार जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा मंडराते जा रहा है,मच्छरों के दिन प्रतिदिन बढ़ते प्रकोप से शहर के नागरिक हलकान हो रहे हैं। वही इंदौर का स्वास्थ्य अमला और नगर निगम इस खतरे से अनजान बन चैन की चादर ओढ़ सोया हुआ है।

उपरोक्त आरोप लगाते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता राजेश चौकसे एवं प्रवक्ता अमित चौरसिया ने अपने संयुक्त प्रेस बयान में इंदौर नगर निगम एवं स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाते लेते हुए कहा कि स्वच्छता में सात बार इंदौर शहर के प्रथम आने के बाद भी समस्याएं यथावत बनी हुई है। इंदौर शहर की कई चैंबर लाइन पूरी तरीके से चौंक पड़ी हुई है, महात्मा गांधी मार्ग आरएनटी मार्ग छावनी, उषा गंज, साउथ तुकोगंज,सहित कई इलाकों में नर्मदा के नल में गंदा पानी आ रहा है। वहीं कई इलाकों में कचरा गाड़ियां आना बंद हो गई है। पूरा शहर मच्छरों के प्रकोप से पीड़ित है इस गंभीर विषय पर पिछले दिनों हुए टॉक शो में यह बात खुद निगम और स्वास्थ्य अधिकारियों ने कबूल करी की 45 लाख की आबादी में मलेरिया विभाग के 35 और इंदौर नगर निगम के 25 कर्मचारी मच्छरों की समस्या से निजात पाने के लिए जुटे हुए हैं लेकिन आबादी के मान से यह संख्या कम है । मच्छरों से मुक़ाबला करने के लिए फाग मशीन या दवाएँ कारगार साबित नहीं हो पा रही है बल्कि नागरिकों की जागरूकता से ही इस समस्या से मुक़ाबला किया जा सकता है ।

इस पर नेताद्वय ने कटाक्ष करते हुए महापौर पुष्पमित्र भार्गव से पूछा है कि जब मच्छरों के प्रकोप से जनता को जागरुक होकर खुद ही निपटना है तो फिर नगर निगम और स्वास्थ्य हमले को दिए जाने वाला करोड़ों रुपए का बजट भ्रष्टाचार कर पेट पूजा के लिए है क्या ? मच्छरों के प्रकोप को कम करने के लिए दवाइयां का छिड़काव तो छोड़िए 19 झोनो में दी गई 2-2 फाग मशीने है जिसमें से आदि से अधिक खराब पड़ी हुई है।

इंदौर नगर निगम जनता से भारी भरकम टेक्स तो वसूल कर लेता है पर जब जनता को मूलभूत सुविधाएं देने की बारी आती है तो संसाधनों का अभाव पड़ जाता है। पुरे शहर अस्त व्यस्त हालातो मे है। सड़के खुदी पड़ी है ड्रेनेज़ चेम्बरो से ढकन गयाब है ड्रेनेज़ लाइने चौक पड़ी है। नर्मदा नलों मे गन्दा बदबूदार पानी आ रहा है। भीषण गर्मी मे पेयजल का संकट गहरा रहा है। वही मछरो के बढ़ते प्रकोप से निपटने के लिए नगर निगम और स्वास्थ्य अमले ने इतने बड़े शहर जिसे भाजपा स्मार्ट सिटी कहती है मात्र 60 कर्मचारी लगा कर इतिश्री कर ली है। मछरो को मारने के लिए दवाइयो के छिड़काव होता तो शहर के नागिरको ने नहीं देखा है परन्तु फोग मशीने जरूर निगम के ज़ोनो पर काबड़े मे पड़ी हुई है।

कांग्रेस ने मांग करी है की शहर के बीच में बह रहे नाले में जल्द से जल्द दवाइयों का छिड़काव करवाया जाए, नगर निगम और स्वास्थ्य अमले में इजाफा कर कर्मचारियों की संख्या को बढ़ाया जाए वही फाग मशीनों से शाम के वक्त शहर में धुआं उड़ाया जाए एवं तालाबों कुओं और बावड़ियों में मैं भी दवाइयां का छिड़काव किया जाए जिससे डेंगू का लार्वा वहां पर न पनपे।

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