कल मनाई जाएगी विश्वकर्मा पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 16सितंबर। विश्वकर्मा के दिन कारखानों में मशीनों की पूजा की जाती है और भगवान विश्वकर्मा से प्रार्थना की जाती है कि व्यापार व नौकरी में तरक्की होती रहे. बता दें कि विश्वकर्मा पूजा हर साल कन्या संक्रांति के दिन की जाती है।

तिथि और शुभ मुहूर्त
हर साल कन्या संक्रांति के दिन भगवान विश्वकर्मा की जाती है और इस साल यह पूजा 17 सितंबर 2022, शनिवार के दिन है. इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 36 मिनट पर शुरू होगा और रात 9 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह 11 बजकर 51 मिनट से लेकर 12 बजकर 40 मिनट तक अभिजित मुहूर्त रहेगा.

विश्वकर्मा पूजा विधि
विश्वकर्मा पूजा के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है और यह एक ऐसे भगवान हैं जिन्हें दुनिया का पहला इंजीनियर कहा जाता है. इस दिन भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया जाता है. इस दिन मशीनों की सफाई होती है और लोहे से बने औजारों का उपयोग नहीं किया जाता. इस दिन सुबह उठकर उठकर स्नान आदि कर भगवान विष्णु और भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा का पूजन किया जाता है. उन्हें पंचमेवा, पंचामृत का भोग और मिष्ठान का भोग लगाएं. फिर धूप-दीप जलाकर आरती करें.

विश्वकर्मा पूजा का महत्व
मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने सतयुग के स्वर्ग लोक, श्रेता युग की लंका, द्वापर की लंका, द्वापर की द्वारिका और कलयुग की हस्तिनापुर की रचना की थी. यहां तक कि सुदामापुरी का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने किया था. इसलिए उन्हें कलाकार, बुनकर, शिल्पकार और व्यापारी माना जाता है. भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है और यही वजह है कि विश्वकर्मा पूजा के दिन उद्योगों और फेक्ट्र‍ियों में मशीनों की पूजा की जाती है.

विश्वकर्मा पूजा के दिन भगवान विश्वकर्मा और भगवान विष्णु का ध्यान करें. साथ ही में फुल व अक्षत लेकर इस मंत्र का जाप करें.
ऊं आधार शक्तपे नमः
ऊं कूमयि नमः
ऊं अनंतम नमः
ऊं पृथिव्यै नमः
ऊं श्री सृष्टतनया सर्वसिद्धया विश्वकर्माया नमो नमः.
मंत्र पढ़ने के बाद हाथ में रखे अक्षत को चारों तरफ छिड़क दें और इसके बाद पीली सरसों लेकर चारों दिशाओं को बांध लें. पीली सरसों से सभी दिशाओं को बांधने के बाद अपने हाथ में रक्षा सूत्र (पत्नी हों तो उनके हाथ में भी) बांध लें और हाथ में जो फूल रखा था उसे जल पात्र में रख दें. इसके बाद हृदय में देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए विधिवत पूजा शुरू करें.

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