समग्र समाचार सेवा
देहरादून, 18अगस्त। एक पत्नी और बेटी की उम्मीद तब सफल हो गई, जब 38 साल बाद शियाचिन में तैनात एक सैनिक का शव उनके घर पहुंचा। साल 1984 ऑपरेशन मेघदूत के दौरान एलएनके दिवंगत चंद्रशेखर शहीद हो गए थे। लेकिन, उनका शव नहीं बरामद हो सका। जिसके बाद भारतीय सेना के एक गश्ती दल ने एलएनके (दिवंगत) चंद्र शेखर का शव बरामद किया। शव को सैन्य सम्मान के साथ उनके घर लाया गया। वहीं, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी के इस लाल को श्रद्धांजलि अर्पित की।
38 साल पहले लापता हुए सैनिकों में से एक सैनिक का शव मिला है। ऑपरेशन मेघदूत के दौरान लगभग 2000 से ज्यादा सैनिक शहीद हो गए थे।
1984 में ऑपरेशन मेघदूत में तैनाती के दौरान वीरगति को प्राप्त एलएनके चंद्र शेखर के पार्थिव अवशेष को लेह लाया गया था। जहां से उनके शव को उनके घर हल्द्वानी ले जाया गया।
एलएनके (दिवंगत) चंद्र शेखर की पहचान उनके सेना की संख्या वाली पहचान डिस्क की मदद से की गई। जो उनके शव के साथ लिपटा हुआ था।
हल्द्वानी में सैनिक का पार्थिव शरीर पहुंचने पर लोगों ने नम आंखों के साथ शहादत को सलाम किया।
लांस नायक चंद्रशेखर हल्द्वानी उत्तराखंड के रहने वाले थे। जिस वक्त वे शहीद हुए थे। उस वक्त उनकी पत्नी शांति देवी की उम्र 25 साल थी। जो अब 63 साल की हैं। वहीं, उनकी बेटी कविता की उम्र 42 साल हो चुकी हैं।
38 साल बाद उत्तराखंड के चंद्रशेखर का शव जब हल्द्वानी पहुंचा तो राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनको श्रद्धांजलि अर्पित की।
पिता की शहादत पर बेटी ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन था कि पिता एक दिन जरूर वापस लौटेंगे।
उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हम उनकी शहादत को प्रणाम और नमन करते हैं। हमें गर्व है कि हम उत्तराखंड के वासी हैं जहां के वीर सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है। चंद्र शेखर आज से लगभग 38 साल पहले लापता हो गए थे। हम उनके परिवार के सदस्यों के साथ हैं।