एक दिन में होते है कितने और कौन से मुहूर्त, यहां जानें शुभ- अशुभ मुहूर्त से जुड़ी सभी बातें…

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 1जुलाई। हिन्दू धर्म में कोई भी अच्छा कार्य करने से पहले शुभ- अशुभ मुहूर्त देखा जाता है। शुभ मुहूर्त में अच्छे काम कर लिए जाते है और अशुभ मुहूर्त से परहेज किया जाता है। दिन व रात मिलाकर 24 घंटे के समय में, दिन में 15 व रात्रि में 15 मुहूर्त मिलाकर कुल 30 मुहूर्त होते हैं अर्थात् एक मुहूर्त 48 मिनट (2 घटी) का होता है।

मुहूर्त का नाम समय प्रारंभ समय समाप्त
रुद्र 06.00 06.48
आहि 06.48 07.36
मित्र 07.36 08.24
पितृ 08.24 09.12
वसु 09.12 10.00
वराह 10.00 10.48
विश्‍वेदेवा 10.48 11.36
विधि 11.36 12.24
सप्तमुखी 12.24 13.12
पुरुहूत 13.12 14.00
वाहिनी 14.00 14.48
नक्तनकरा 14.48 15.36
वरुण 15:36 16:24
अर्यमा 16:24 17:12
भग 17:12 18:00
गिरीश 18:00 18:48
अजपाद 18:48 19:36
अहिर बुध्न्य 19:36 20:24
पुष्य 20:24 21:12
अश्विनी 21:12 22:00
यम 22:00 22:48
अग्नि 22:48 23:36
विधातॄ 23:36 24:24
कण्ड 24:24 01:12
अदिति 01:12 02:00
जीव/अमृत 02:00 02:48
विष्णु 02:48 03:36
युमिगद्युति 03:36 04:24
ब्रह्म 04:24 05:12
समुद्रम 05:12 06:00

शुभ मुहूर्त क्या है?
हिंदू धर्म में किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य करने से पहले शुभ मुहूर्त देखा जाता है कहा जाता है कि शुभ मुहूर्त में किया जाने वाला कोई भी कार्य या अनुष्ठान हमेशा सफल होता है और अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। इसी कारण से हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग किसी भी तरह के शुभ कार्य,धार्मिक अनुष्ठान,पूजा-पाठ, विवाह, गृह प्रवेश आदि के लिए ज्योतिषाचार्य या पंडित से शुभ मुहूर्त के बारे में सलाह अवश्य लेते हैं। शुभ मुहूर्त किसी भी नए कार्य के शुभारंभ या मांगलिक कार्य को शुरू करने का वह समय होता है जिस दौरान सभी ग्रह और नक्षत्र अच्छी स्थिति में होते हुए शुभ फल प्रदान करते हैं। मुहूर्त शास्त्र के अध्ययन से जीवन में होने वाले शुभ और मांगलिक कार्यों के शुभारंभ के लिए एक तिथि और समय का निर्धारण किया जाता है। यानी किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ के लिए सबसे अच्छे समय ही मुहूर्त कहलाता है।

मुहूर्त की गणना कैसे होती है?
जीवन में होने वाली समस्याओं तथा उनके अनुकूल व प्रतिकूल समय को जानकर उसे प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाते हुए अनुकूल स्थितियों को लाभ उठाने योग्य बनाना ही मुहूर्त ज्योतिष का मौलिक कार्य है। यदि कोई भी जातक शुभ मुहूर्त में कार्य आरंभ करता है तो सफलता उसके कदम चूमती है,किन्तु अशुभ मुहूर्त में किये गए कार्यों का परिणाम अच्छा नहीं रहता। जिस तरह दिन रात में 24 घंटे 12 राशियां लग्न विचरण करती हैं उसी प्रकार दिन और रात के मध्य 30 मुहूर्त भी घटित होते हैं। ये मुहूर्त अपने-अपने नाम और उनके गुणों के अनुसार अपने मध्य किए गए कार्यों का शुभा-शुभ फल ही नहीं देते अपितु मुहूर्तो के मध्य पैदा लोगों का जीवन भी इससे प्रभावित होता है। देखा गया है कि शुभ मुहूर्त में जन्मा जातक कामयाबियों के चरम पर होता है जबकि, अशुभ मुहूर्त में जन्म लेने वाला जातक जीवन में भारी संघर्ष एवं उतार-चढ़ाव का सामना करता है,वह जितनी भी मेहनत करता है उसके अनुसार उसका फल नहीं मिलता अतः जन्म कुंडली का फलादेश करते समय यदि जातक के जन्म के समय क्षितिज को स्पर्श कर रहे मुहूर्त पर भी ध्यान दिया जाए तो फलादेश और सटीक रहेगा। वैदिक ज्योतिष शास्त्र कुछ शुभ मुहूर्त इस प्रकार के होते हैं।

शुभ मुहूर्त के प्रकार
अभिजीत मुहूर्त- सभी मुहूर्तों में अभिजित मुहूर्त अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है। अभिजित मुहूर्त प्रत्येक दिन दोपहर से करीब 24 मिनट पहले शुरू होकर दोपहर के 24 मिनट बाद समाप्त हो जाता है।
चौघड़िया- मुहूर्त शास्त्र में चौघड़िया मुहूर्त का विशेष स्थान होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी शुभ और मांगलिक कार्य के लिए कोई शुभ मुहूर्त न मिले तो उस अवस्था में चौघड़िया मुहूर्त में उस कार्य को किया जा सकता है।
होरा-अगर कोई शुभ कार्य करना अत्यंत ही जरूरी हो, लेकिन उस दौरान शुभ मुहूर्त का अभाव हो तो ज्योतिष में होरा चक्र की व्यवस्था बनाई गई है।
लग्न तालिका-विवाह मुहूर्त, मुंडन संस्कार और गृह प्रवेश मुहूर्त समेत सभी शुभ कार्यों के मुहूर्त के लिए शुभ लग्न तालिका देखा जाता है।
गौरी शंकर पंचांगम- गौरी शंकर पंचांगम को नल्ला नेरम भी कहा जाता है जिसका अर्थ शुभ समय होता है। यह मुहूर्त श्रेष्ठ फलदायी होता है।
गुरु पुष्य योग- जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बने तो इसे गुरु पुष्य योग कहा जाता है।गुरु पुष्य योग सभी योगों में प्रधान है। इस योग में किया गया हर एक कार्य शुभ होता है।
रवि पुष्य योग- रविवार और पुष्य नक्षत्र के संयोग को रवि पुष्य योग कहा जाता है। रवि पुष्य योग समस्त शुभ कार्यों के प्रारंभ के लिए उत्तम माना गया है।
अमृत सिद्धि योग- अमृत सिद्धि योग भी शुभ मुहूर्तों में एक होता है।इस योग में किए गए सभी कार्य पूरे होते हैं। मांगलिक कार्य के शुभ मुहूर्त के लिए इस योग को पहले स्थान पर रखा जाता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग –यह योग सभी तरह के मनोकामनाओं का पूरा करने वाला शुभ योग कहलाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग एक निश्चित वार और निश्चित नक्षत्र के संयोग से बनता है। किसी भी तरह के शुभ कार्य को इस योग में किया जा सकता है।
शुभ मुहूर्त की गणना का आधार
शुभ मुहूर्त की गणना करने के कई आधार होते हैं। जिसमें मुख्य रूप से हिंदू वैदिक ज्योतिष पंचांग की गणना, ग्रहों की चाल और स्थिति,सूर्योदय एवं सूर्यास्त का समय और शुभ नक्षत्र आदि होते हैं। हालांकि अलग-अलग समारोह और आयोजनों के लिए मुहूर्त अलग-अलग होते हैं।

राहुकाल एक अशुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त के अलावा कई तरह के अशुभ मुहूर्तों का भी समय-समय पर निर्धारण होता है। जिसमें राहुकाल का स्थान प्रमुख है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहुकाल को शुभ नहीं माना जाता है। इस काल पर राहु का स्वामित्व होता है और एक पापी ग्रह माना गया है। राहुकाल प्रत्येक दिन में डेढ़ घंटे तक रहता है जिसमें इस अवधि के दौरान कोई भी महत्वपूर्ण कार्य न करने का विधान है।

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