समग्र समाचार सेवा
अलवर, 3 अप्रैल। सरिस्का टाइगर रिजर्व के जंगलों में लगी आग पर काफी मशक्कत के बाद काबू पा लिया गया है। आग बुझाने के लिए वायु सेना के हेलीकॉप्टर को लगाया गया था। वहीं जमीनी स्तर पर वन विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों के सहयोग से आग पर काबू पाया गया। ये आग काफी भयावह थी। उसे काबू करने के लिए एसडीआरएफ के 22 जवानों ने सरिस्का पहुंचकर जी जान लगा दी। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आग पर आंशिक काबू पा लिया गया है। जल्द ही इस पर पूरी तरह से काबू पा लिया जाएगा।
आग के कारणों का लगाया जाएगा पता
सरिस्का के फील्ड डाइरेक्टर आरएन मीणा ने सरिस्का डीएफओ सुदर्शन शर्मा को मामले की जांच के आदेश दिये हैं। शर्मा आग लगने के कारणों और अधिकारियों की लापरवाही की जांच कर फील्ड डाइरेक्टर को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। दूसरी तरफ आग से उपजे हालात का जायजा लेने के लिए मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक अरिंदम तोमर ने भी प्रभावित इलाके का दौरा किया।
कुछ जगहों पर धीमी-धीमी आग जल रही
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आग पर काबू पा लिया गया है। कुछ जगहों पर अभी भी धीमी आग लगी हुई है। उससे कोई चिंता की बात नहीं हैं। अन्य सभी जगहों पर काबू पा लिया गया है। उन्होंने बताया कि जयपुर, दौसा और भरतपुर सहित आसपास जिलों की टीमें आग बुझाने में लगी थीं। हेलीकॉप्टर की मदद से भी आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया था।
जांच के लिए एक टीम बनाई गई है
तोमर ने कहा कि आग लगने के कारणों की जांच पड़ताल चल रही है। इस पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम बनाई गई है। इसके साथ ही आगामी समय में फिर कभी आग नहीं लगे इसके भी प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्रीय फॉरेस्ट विभाग की तरफ से जिस दिन आग लगी थी उस समय अलर्ट जारी कर दिया गया था। उससे पहले वन विभाग को आग लगने की जानकारी मिल चुकी थी।
तेज हवा के कारण बेकाबू हुई आग
तोमर ने बताया कि केंद्रीय फॉरेस्ट विभाग की तरफ से दोपहर 3 बजकर 40 मिनट पर सरिस्का में आग लगने का अलर्ट जारी किया गया था। सेटेलाइट इमेज के माध्यम से यह अलर्ट जारी किए जाते हैं, लेकिन फॉरेस्ट विभाग को दोपहर 3 बजे ही इसकी जानकारी मिल गई थी। उसके बाद से लगातार रेंजर और वन विभाग के अन्य अधिकारी आग बुझाने के काम में लग गए थे। उन्होंने कहा कि आग पर अगले दिन सुबह 5 बजे तक काबू पा लिया गया था, लेकिन उसके बाद दिन में चली तेज हवा के कारण अचानक आग बढ़ गई।
सरिस्का में फिलहाल 27 बाघ, बाघिन और शावक हैं
उल्लेखनीय है कि सरिस्का में फिलहाल 27 बाघ, बाघिन और शावक हैं। इनमें 7 शावक, 9 बाघ 12 बाघिन हैं. हालांकि अभी तक बाघ एसटी-13 की तलाश चल रही है. बाघ-13 मिसिंग है। सरिस्का बाघ अभ्यारण्य की अकबरपुर रेंज में गत रविवार को आग लग गई थी। उसके बाद यह बेकाबू होती गई। जंगल में आग का आज चौथा दिन है। वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सरिस्का में बाघों का कुनबा बढ़ रहा है। सरिस्का का जंगल बाघों के लिए बेहतर है।