समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 29अक्टूबर।
अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि जिसे शरद पूर्णिमा भी कहा जाता है 30 अक्टूबर यानी कल है। शरद पूर्णिमा के दिन कोजागरी लक्ष्मी पूजा होती है। आपको बता दें कि दिवाली से पहले माता लक्ष्मी की पूजा करने का यह शुभ समय होता है। कुछ पौराणिक मान्याओं के मुताबिक, माता लक्ष्मी का अवतर शरद पूर्णिमा के दिन ही हुआ था। इस दिन माता लक्ष्मी देर रात में पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं।
कोजागरी पूजा का शुभ मुहूर्त
कोजागर पूजा शुक्रवार, अक्टूबर 30, 2020 को
कोजागर पूजा निशिता काल – 23: 39 to 00:31, अक्टूबर 31
कोजागर पूजा के दिन चन्द्रोदय – 17:11
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 30, 2020 को 17:45 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – अक्टूबर 31, 2020 को 20:18 बजे
कोजागरी पूर्णिमा का महत्व
इस तिथि पर मध्य रात्रि या निशिथ काल में पूजा करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और इस रात आसमान से अमृत की वर्षा होती है. देवी लक्ष्मी कोजागरी पूर्णिमा की रात पृथ्वी पर विचरण करती हैं और अपने भक्तों को धन-संपदा और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कोजागरी पूर्णिमा या शरद पूर्णिमा की रात्रि में माता लक्ष्मी जब धरती पर विचरण करती हैं तो ‘को जाग्रति’ शब्द का उच्चारण करती हैं. इसका अर्थ होता है कौन जाग रहा है. वो देखती हैं कि रात्रि में पृथ्वी पर कौन जाग रहा है. जो लोग माता लक्ष्मी की पूरी श्रद्धा से पूजा करते हैं, उनके घर मां लक्ष्मी जरुर जाती हैं।
कोजागरी पूर्णिमा पूजा विधि-
पूर्णिमा के दिन पीतल, चांदी, तांबे या सोने से बनी देवी लक्ष्मी की प्रतिमा को कपड़े से ढंककर पूजा किया जाता है. सुबह देवी की पूजा करने के बाद रात में चंद्रोदय के बाद फिर से की जाती है. इस दिन रात 9 बजे के बाद चांदी के बर्तन में खीर बना कर चांद के निकलते ही आसमान के नीचे रख देनी चाहिए. इसके पश्चात रात्रि में देवी के समक्ष घी के दीपक जला दें. इसके बाद देवी के मंत्र, आरती और विधिवत पूजन करना चाहिए. कुछ समय बाद चांद की रोशनी में रखी हुई खीर का देवी लक्ष्मी को भोग लगाकर उसमें से ही ब्राह्मणों को प्रसाद स्वरूप दान देना चाहिए। अगले दिन माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए और व्रत का पारण करना चाहिए।