नवरात्र के चौथे दिन वाराणसी में मां कुष्मांडा के दर्शन के लिए लगी भक्तो की भीड़
आज के दिन मां कूष्माण्डा देवी की होती है पूजा
समग्र समाचार सेवा
वाराणसी, 20अक्टूबर।
शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप कुष्मांडा पूजा की जाती है। वाराणसी में मां कुष्मांडा का दुर्गाकुंड में भव्य अति प्राचीन मंदिर है। बता दें कि रात्री से ही यहां माँ कुष्मांडा के दर्शनों के लिए भक्तो की भीड़ उमड़ पड़ती है। यह विश्व प्रशिद्ध माँ दुर्गा का मन्दिर है , यहाँ माँ को नारियल चढ़ाने का विशेष महत्व है। माँ को चुनरी के साथ लाल देवी फुल की माला व मिष्ठान का भोग लगाया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि देवी जिनके उदर में त्रिविध तापयुक्त संसार स्थित है वह कूष्माण्डा हैं देवी कूष्माण्डा इस चार जगत की अधिष्ठात्री हैं। जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय अंधकार का साम्राज्य था तब देवी कुष्मांडा जिनका मुखमंड सैकड़ों सूर्य की प्रभा से प्रदिप्त है उस समय प्रकट हुई उनके मुख पर बिखरी मुस्कुराहट से सृष्टि की पलके झपकनी शुरू हो गयी और जिस प्रकार फूल में अण्ड का जन्म होता है उसी प्रकार कुसुम अर्थात फूल के समान मां की हंसी से सृष्टि में ब्रह्मण्ड का जन्म हुआ अत: यह देवी कूष्माण्डा के रूप में विख्यात हुई।