तमिलनाडु दीपम विवाद: मदुरै हाईकोर्ट, 5 लोगों की टीम जलाए पहाड़ी पर दीप

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समग्र समाचार सेवा
मदुरै ,तमिलनाडु 3 मार्च : तमिलनाडु के तिरुप्पारनकुंड्रम में सदियों पुरानी दीपम जलाने की परंपरा को लेकर चल रहे विवाद में मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन ने कहा कि कोर्ट द्वारा नामित पांच व्यक्तियों की एक टीम को दीपाथून के नाम से जानी जाने वाली पहाड़ी के स्तंभ तक जाने और 15 मिनट तक प्रतीकात्मक प्रार्थना करने की अनुमति दी जा सकती है।

यह मामला तब उलझ गया जब जिला प्रशासन के निषेधाज्ञा आदेश और कोर्ट के निर्देशों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा, “खीर का स्वाद खाने में ही पता चलता है।” उन्होंने इशारा किया कि पुलिस ने कलेक्टर के आदेश की आड़ लेकर अदालत के निर्देशों को लागू करने से रोका है।

सदी पुरानी परंपरा का सवाल

अरुलमिगु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के पास स्थित पहाड़ी पर दीप जलाने को लेकर यह विवाद काफी पुराना है। मंदिर प्रशासन का तर्क है कि एक सदी से भी अधिक समय से कार्तिगई दीपम केवल पहाड़ी की चोटी पर स्थित उची पिल्लैयार मंदिर के पास ही जलाया जाता रहा है। वे इस परंपरा में बदलाव को भक्तों की भावनाओं के विरुद्ध मानते हैं।

कलेक्टर की माफी और स्पष्टीकरण

मदुरै जिला कलेक्टर केजे प्रवीणकुमार ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि बीएनएसएस की धारा 163 के तहत जारी निषेधाज्ञा आदेश केवल कानून-व्यवस्था की स्थिति को रोकने के लिए था। उनका कहना था कि यह आदेश मंदिर अधिकारियों को 1 दिसंबर के आदेश के अनुसार दीपम जलाने से रोकने के लिए नहीं था।

कलेक्टर ने दूसरी बार अदालत में बिना शर्त माफी मांगी और उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दी गई। हालांकि, कोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अगली सुनवाई पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

राज्य सरकार की प्रतिक्रिया

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा। उन्होंने कहा, “हमें अभी तक सरकार से निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पांच सदस्यीय टीम का सुझाव केवल पूर्व आदेश के सम्मान के लिए एक प्रस्ताव है, कोई बाध्यकारी निर्देश नहीं।

आगे की राह

न्यायालय ने तमिलनाडु के मंत्री रेगुपति के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने की याचिका को बंद कर दिया, लेकिन साथ ही कहा कि इसे कभी भी फिर से खोला जा सकता है। अगली सुनवाई 14 मार्च को होगी, जिसमें इस संवेदनशील मामले पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

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