दिल्ली कार ब्लास्ट : फिदायीन हमले के पीछे पाकिस्तानी जिहादी नेटवर्क का हाथ

दिल्ली के लाल किला हमले का पर्दाफाश

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पूनम शर्मा
कल शाम दिल्ली के लाल किले के पास हुए भयंकर कार धमाके ने पूरी राजधानी को दहला दिया। प्रारंभिक जाँच  और सुरक्षाकर्मियों की रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि यह एक संगठित आतंकी हमला था, न कि कोई साधारण दुर्घटना। केंद्र सरकार और जाँच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की तह तक पहुँचने  में जुटी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो इस समय भूटान के दौरे पर थे, ने देश को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “मैं भारी मन से यहाँ  आया हूँ, लेकिन जो भी इस तरह की साजिश में लिप्त होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।” अमित शाह सहित अन्य वरिष्ठ नेता भी लगातार यह बयान दे रहे हैं कि हर एंगल से जांच की जा रही है और आतंकियों को छोड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

जानकारी के अनुसार यह हमला फिदायीन हमले के रूप में अंजाम दिया गया। घटनास्थल पर मिली जानकारी से यह स्पष्ट हुआ कि इसमें जैश-ए-मोहम्मद के स्लिपर्स सेल की भूमिका थी। यह कोई आम आतंकवादी गतिविधि नहीं थी बल्कि लंबे समय से चली आ रही योजनाओं का हिस्सा था।जाँच  में अब तक कई गिरफ्तारियां हुई हैं।

शुरुआती गिरफ्तारी में शामिल हैं:
डॉक्टर अहमद – प्रमुख आरोपी
उमर मोहब्बत – फिदायीन हमला करने वाला आतंकवादी
डॉक्टर शाहीन शाहिदा – लखनऊ की रहने वाली महिला, हथियारों के साथ पकड़ी गई
अन्य सात नामचीन आरोपी, सभी डॉक्टर और पढ़े-लिखे युवा, जिन्हें व्हाइट कॉलर जिहादी कहा जा रहा है

जाँच  के अनुसार, उमर ने हमला करने के लिए लाल किले के पास भीड़ का इंतजार किया और जैसे ही मौका मिला, फिदायीन हमला अंजाम दिया। धमाके में इस्तेमाल 3,000 किग्रा अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फोटक पाए गए, जिनकी योजना दिल्ली के बड़े हिस्सों को नुकसान पहुंचाने की थी।

दिल्ली पुलिस, एनआईए और अन्य केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त ऑपरेशन के तहत जाल बिछाया और कई स्थानों पर छापेमारी की। इनमें शामिल हैं:

फरीदाबाद में मॉड्यूल पकड़ा गया लखनऊ और सहारनपुर में छापेमारी

दिल्ली एनसीआर में  सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क का पर्दाफाश

विशेषज्ञों के अनुसार यह हमला 2008-09 के पुराने आतंकवादी नेटवर्क से जुड़ा है, जो पाकिस्तान द्वारा संचालित था। इंडियन मुजाहिद्दीन और पीएफआई के पुराने नेटवर्क से यह पूरी घटना जुड़ी हुई है।

सरकार की ओर से जारी जानकारी में बताया गया कि गिरफ्तार आतंकियों के पास हथियार और विस्फोटक तकनीक के आधुनिक साधन मिले हैं। उन्हें विभिन्न जगहों पर सरकारी नौकरियों में रखा गया था ताकि उन्हें भारत के अंदर आसानी से नेटवर्क तैयार करने का मौका मिल सके।

महिला आतंकियों की भूमिका

यह  भी चिंताजनक पाई गई है। डॉक्टर शाहीन शाहिदा ने अपने सहयोगियों के साथ हथियार और विस्फोटक सामग्री की सप्लाई में मदद की। यह संकेत है कि आतंकवाद अब केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पढ़े-लिखे युवा और महिलाएं भी इसमें सक्रिय हैं।

जांच में यह बात भी सामने आई कि आतंकियों का सुपरवाइजिंग हेडक्वार्टर पाकिस्तान में था, और वहाँ  से उन्हें निर्देश मिल रहे थे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी आतंकियों के ठिकानों पर हुई कार्रवाई के बदले में यह हमला योजनाबद्ध था।

प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान दौरे के दौरान यह साफ कर दिया कि भारत किसी भी साजिश को बख्शेगा नहीं। यह हमला भारत की सुरक्षा और राजधानी की सुरक्षा पर सीधे हमला था, और इसके पीछे लंबी योजना और पाकिस्तानी जिहादी संगठन का हाथ है।

अगले कुछ दिनों में सरकार और जाँच  एजेंसियां पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी हैं। इसके तहत गिरफ्तार आतंकियों से और भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। यह हमला देश के लिए चेतावनी है कि आतंकवाद अब ज्यादा संगठित और खतरनाक हो गया है, और इसके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई जरूरी है।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि दिल्ली, और पूरी भारत सरकार की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं, और आतंकवादियों को अंजाम तक पहुँचाने से पहले ही पकड़ने में सक्षम हैं।

सारांश:

कल लाल किले पर हुआ धमाका सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि लंबे समय से तैयार की गई जिहादी साजिश का हिस्सा था। पाकिस्तान के आतंकवादी नेटवर्क और स्थानीय स्लिपर्स सेल की सक्रियता के चलते इस हमले को रोकने के लिए संयुक्त ऑपरेशन चलाया जा रहा है। गिरफ्तारियों और छापेमारी से पूरी साजिश का पर्दाफाश हो रहा है, और सरकार का संदेश साफ है – देश के भीतर आतंकवादियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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