भारतीय किक्रेट की महिला तेंदुलकर बनी मिताली राज

सदाबहार नही परफेक्ट सुपर कप्तान   महिला  तेंदुलकर मिताली राज

* भारतीय महिला क्रिकेटर मिताली राज ने रचा  इतिहास *  यह कारनामा करने वाली बनी दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर 
नयी दिल्ली। सचिन तेंदुलकर भले ही किक्रेट जगत के दुर्लभ इतिहास पुरुष हो। जिनके नाम ज़्यादातर रिकॅार्ड भरे हैं। मगर महिला किक्रेट में सचिन तेंदुलकर के रुप में मिताली राज भी नायाब किक्रेटर के रुप में लेडीज तेंदुलकर बन गयी है।  वनडे क्रिकेट में मिताली ने 100 से ज्यादा मैचों यानी 123 वनडे में  मिताली राज ने कप्तानी की है। वे अभी भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की मुखिया है। यह एक ऐसा इतना लंबा नायाब और दुर्लभ रिकॉर्ड मिताली राज के नाम है। यह एक  ऐसा सौभाग्य है कि पूरे  विश्व के किसी और महिला हो या पुरूष किसी भी किक्रेटर  को यह नसीब नहीं हुआ। महिला क्रिकेट टीम की वनडे कैप्टन मिताली राज ने खास उपलब्धि हासिल की है। वह दुनिया की ऐसी पहली महिला क्रिकेटर बन गई है जिन्होंने अपने करियर में 200 वन-डे खेला हैं। उन्होंने शुक्रवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ हैमिल्टन में यह शानदार उपलब्धि हासिल की। बतौर कप्तान उनका 123वां मैच है जो एक रिकॉर्ड है। उन्होंने पिछले साल अप्रैल में इंग्लैंड की पूर्व कप्तान चार्लोट एडवर्ड्स के 191 मैचों के वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ा था।  यह मैच इंग्लैंड और भारत के बीच नागपुर में खेला गया था। मिताली ने वनडे में करियर का आगाज जून 1999 में किया था और आयरलैंड के खिलाफ अपने क्रिकेट करियर का पहला वनडे खेला था। उन्होंने इस पहले ही मैच में नाबाद 114 रन की पारी खेली थी और भारत यह मुकाबला 161 रन से जीता था। भारतीय महिला टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में पहले ही 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। महिला क्रिकेट में सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड भी मिताली के ही नाम है और उन्होंने 200 वनडे मैच में में 6622 रन बनाए हैं। जबकि 200ट  टेस्ट में 463 वनडे मैच में मास्टर ब्लास्टर ने 51 शतकों के साथ 18423 रनों का हिमालय खड़ा हो गया है।

महिला और पुरुष क्रिकेट दोनों में सबसे अधिक मैच खेलने का विश्व रिकार्ड भारतीय पुरुष क्रिकेट में सबसे अधिक वनडे मैच खेलने का वर्ल्ड रेकॉर्ड भी मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के नाम है। जिन्होंने 463  मैच में भारत का प्रतिनिधित्व किया। खास बात यह है कि बतौर बल्लेबाज भले ही उनका बल्ला खूब चला। 51 शतकों के साथ 18423 रन बनाए हों, मगर बतौर कप्तान वे टेस्ट मैच और वन डे में विफल रहे। कप्तानी की पारी में कोई चमत्कार नहीं दिख पाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने इस असफलता को ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से पूरी कर दी। यही कारण है कि मास्टर ब्लास्टर के बल्ले की गूंज हर जगह अहसास कराती हैं,। अकप्तानी के उल्लेख होने पर उनका खेल की 

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